एहसासों का रास्ता
एक अरसा पहले, लॉजिक से परे की दुनिया को एक्सप्लोर करने का मन हुआ था। क्या होगा अगर हम बिना कुछ सोचे समझे। केवल एहसासों के सहारे आगे बढ़ते चलें? जिधर जो अच्छा लगे उधर मुड़ जाना, ज़रा देखें हमें क्या मिलता है और हम कहाँ पहुँचते हैं।
उस दिन एक बच्चे की मुस्कान दिखी थी। हम उसकी तरफ़ मुड़े और उसके पैरेंट्स से बातें कीं, फिर वे लोग एक रास्ते पर आगे बढ़ चले। हम भी कुछ देर बाद उसी रास्ते पर चल दिए। एक मोड़ पर दूसरे कुछ बच्चे खेलते नज़र आये तो उस तरफ़ मुड़ गये। उससे आगे एक तालाब मिला, जिधर कभी नहीं गये थे। वहाँ की मछलियों को देखते हुए वहाँ के केयरटेकर से बातें की। फिर तालाब का एक चक्कर लगाने का मन हुआ और हमें उस तरफ़ झींगुरों की तेज़ आवाज़ें सुनाई देने लगीं। उस तरफ़ पूरा झींगुर की आवाज़ों से लिपटा एक अज़ीब सा सन्नाटा फैला था। ठीक पीछे से जाती सड़क के उस पार वह बच्चा फिर नज़र आया। इस बार उसकी मुस्कान रहस्यमयी लगी और वह अपने पैरेंट्स के साथ शहर के रास्ते पर आगे बढ़ गया। हम झींगुरों की आवाज़ों से घिरे हुए थे। वहाँ का सन्नाटा एकदम डरावना सा था। तभी एक कटी पतंग आसमान से गिर कर ठीक हमारे सामने आ गयी। ऐसा हमारे जीवन में कभी नहीं हुआ, जिसके पीछे बचपन में हम भागते रहे, वह एक दिन यूँ ही आहिस्ते से सन्नाटे में मिल जायेगी! पतंग उठाने का मन नहीं था लेकिन बालमन के चलते उसे यूँ ही उठा लिया। वैसे भी सन्नाटे में कोई देख नहीं रहा था। वहाँ से निकलकर वापस मैदान की तरफ़ आये तो एक दूसरा बच्चा अपने माता-पिता के साथ खेल रहा था। मेरे हाथ में उसने पतंग देखा तो सीढ़ियो पर बैठी अपनी मम्मी की तरफ़ कौतुक नज़रों से देखने लगा। हमने मुस्कुराते हुए उसे पतंग दिया तो उसकी मम्मी ने हँसते हुए कहा - अभी यह पतंग लेने की बात कर रहा था। फिर उन्होंने अपने बच्चे से कहा - देखा बेटा! कैसे भगवान जी विश पूरी कर देते हैं। बच्चा हमें आश्चर्य भरी नज़रों से देख रहा था। उस समय हम उसके लिए किसी देवदूत जैसे ही थे, जो मन की विश पूरी कर देता है।
...और हम इस आश्चर्य में डूबे थे कि एहसासों का रास्ता क्या हमें देवत्व की तरफ़ ले जाता है?
क्योंकि लॉजिक का रास्ता हमने बहुत देखें हैं, अभी दिल्ली में सबकी लॉजिक ने मिलकर यूपीएससी वाले बच्चों के लिए जो बेसमेंट रूपी कब्रगाह बनाई है... वह किसी से छिपा नहीं है। अभी इतनी मौतों के बाद 'एहसास' जागा है और बच्चे उन रास्तों पर एहसासों के बीज फैला रहे हैं।
उस मैदान से दूर आने के बाद जब पीछे घूमकर देखा तो पिता और पुत्र पतंग के साथ मस्ती में खेल रहे थे और हमारे भीतर एक अद्भुत भावना उमड़ रही थी। एहसासों के रास्ते एक अलग सी जादुई दुनिया में ले जाते हैं, जहाँ सुख है और सुकून भी।
इस हक़ीकत से सामना हुआ, 28 जून 2022 को IIT कानपुर के प्रोनाइट ग्राउंड में। इसके बाद एहसासों का रास्ता ऐसे मुकाम तक पहुँचाया, जहाँ से इस दुनिया के दूसरे रंग भी नज़र आने लगते हैं।
