इंद्रधनुष

अपनी सुनहरी किरणों के साथ सूरज डूब रहा था, आसमान पर छाये काले बादलों की दुनिया भी रंगीन हो चली थी। थोड़ी देर पहले बारिश हुई थी, और वह मैदान की हरी घासों पर दौड़ता हुआ उस तालाब के किनारे पहुँच गया, जहाँ बैठकर वह उन तरंगों को निहार रहा था और वह कह रही थी – "देखो! वहाँ… वहाँ मछली थी।"

अचानक ही काले बादलों से पानी की धार फूट पड़ी थी और दोनों अपने अपने घरों की तरफ दौड़ पड़े थे। 

वह तालाब के किनारे बैठा फिर से पानी की सतह पर तरंगों को गौर से निहारने लगा, उसके मन में भी ऐसी ही तरंगे उठ रही थी, मछली वहाँ भी तैर रही थी। 

वह फिर से आ गयी और हाँफते हुए बोली – "कोई मछली दिखी क्या?"

वह उसे देख कर मुस्कुरा भर देता है और उन तरंगों को निहारने लगता है। 

एकाएक तरंगों में रंग घुलने लगा, उसे तरंगें सतरंगी नज़र आने लगती हैं। वह उत्साह से चीख पड़ी थी –  "वो देखो! इंद्रधनुष !!"

Rainbow

वह पानी में निहारने लगा और पूछा - "किधर ?"

"अरे उधर नही बुद्धू!! उपर… आकाश में..."

वह मुस्कुराते हुए आकाश में निहरता है, एक रंगीन घेरा नज़र आता है, उसका रंग धीरे धीरे गाढ़ा हो रहा था। 

वह उसके ख्यालों की दुनिया थी, जिसमें एक इंद्रधनुष होता है, उसने कई बार किताबी इंद्रधनुष की छवि अपनी कॉपी पर उतारने की कोशिश किया था लेकिन रंग इतने स्पष्ट नज़र नही आते और एक भद्दा इंद्रधनुष बन जाता था। उसके ख्यालों की दुनिया में एक इंद्रधनुष के साथ आज वह भी थी और वह खुश हो रहा था। 

इंद्रधनुष देखकर वह मुस्कुराते हुए कुछ रंगों के नाम लेती है – बैगनीं, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल.. 

"अभी 6 ही हुए, सातवाँ रंग कौन सा है? तुम्हें कोई और रंग दिख रहा है?"

वह उसकी तरफ देखता है, वह रंगों में खोई थी। उसके चेहरे पर फैला एक अद्भुत रंग उसे नज़र आया। वह तालाब में निहारने लगता है, छोटे छोटे बुलबुलों से उठे तरंग इंद्रधनुषी रंग में सराबोर थे। उसका हृदय ऐसे ही बुलबुलों से भर गया था, तरंगे रंगीन हो उठी थीं। 

तुम कहाँ देख रहे हो? – वह चौक कर उसकी तरफ देखता है। 6 रंग ही दिख रहे हैं, सातवाँ रंग कौन सा है? तुम्हें पता है?

वह ना में सिर हिला देता है। 

"बुद्धू!! तुम्हें कुछ पता भी है? रूको अभी आती हूँ।" वह घर की तरफ दौड़ते हुए चली जाती है। 

वह तालाब किनारे बैठा मन ही मन मुस्कुरा रहा था, वह रंगों में तैर रहा था, इतने रंग जिनके नाम वह खुद नही जानता था। वह तालाब में छूट रहे तरगों की तरफ देख रहा था और अंदरूनी तरंगों को महसूस कर रहा था, जिन्हें इंद्रधनुष ने अपने रंग दे दिये थे। तालाब में तैर रही तरंगों ने जब रंग बदलना शुरु किया तब उसका ध्यान टूटा।

इंद्रधनुष गायब हो रहा था और वह बेचैनी से रास्ते की तरफ देखने लगा। कुछ देर बाद इंद्रधनुष काले बादलों में गुम हो गया और वह मायूस होकर मिट्टी कुरेदने लगा। 

सूरज डूब चुका था, शाम की रंगत बदलने लगी थी और वह उस रास्ते से होकर दौड़ते हुए आ रही थी। 

(हाँफते हुए) पता है! कौन सा रंग छूट रहा था? जामुनी!

…और वह हँसने लगी।

इतने सारे रंगों को छोड़कर वह एक रंग खोजने चली थी। उसे हल्की सी घुटन महसूस हुई। 

धीमी आवाज में वह बोला – "मुझे पता था।"

"झूठे!! पता था तो बताया क्यों नही?"

वह चुप हो गया। मन की तरंगों में अचानक एक लहर सी उठी थी, जो इंद्रधनुष की तरह ही कुछ देर बाद गायब हो गई। वह मुस्कुराया और मछली देखने तालाब की तरफ़ बढ़ चला। लेकिन अब वह मछली देखने के लिए उत्सुक नहीं थी, उसे इंद्रधनुष के गायब हो जाने का मलाल था।  वह उन बुलबुलों के प्रति आकर्षित था, जो मछली और इंद्रधनुष की तरह ही कुछ देर में गायब हो जा रहे थे। वह भी अभी वापस चली जाएगी। उस इंद्रधनुष की तरह। वह एक बार फिर वर्तमान के रंगों में तैरने लगा। उस छोटी उम्र में उसने अपने एहसासों से यह समझ लिया था कि सब कुछ बुलबुलों की सतह पर इंद्रधनुष जैसा है।

(समाप्त)

Rainbow

सबसे पहले यही तस्वीर बना कर पकड़ा दिया था गूगल ने। अब बना ही दिया तो हम क्यों ही बिगाड़ें! क्या पता भविष्य में हमारी इस सहेजने की सोच के चलते हमें एक नोबल पकड़ा दिया जाए। कहानी 2010 में लिखी गयी थी और उसकी कल्पना को तस्वीर के सहारे 2026 में उड़ाया गया।